मुम्बई के नजदीक मेरी रिहाइश ..लेखन मेरे अंतर्मन की फरमाइश ..

जब से हुई है,
उनसे जुदाई....
प्यारी सी लगने लगी है,
बैरन तन्हाई ...!

-राज कुमार कांदु

एक चाँद आसमान में,
एक चाँद बगल में ।
क्यूँ चाँद देखे चाँद को,
जब मैं हूँ बगल में ।।

-राज कुमार कांदु

मोहब्बत आँधी तूफान,
मोहब्बत जलजला है।
मुकम्मल हो तो काबा,
नहीं तो कर्बला है।।


-राज कुमार कांदु

तन्हाई में भी मैं तन्हा नहीं हूँ ..
तेरी याद जो साथ रहती है मेरे !


-राज कुमार कांदु

देख कर तेरी तस्वीर,
हम तो आहें भरते हैं
कहने की जरूरत नहीं,
हम तुझपर मरते हैं
दिल में बसती है,
बस तेरी इक तस्वीर
दिन रात उसे ही,
बस निहारा करते हैं

-राज कुमार कांदु

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दिल के हर कोने में बसी है, बस तू ही तू ।
तेरी ही बस आरजू है,
तेरी ही जुस्तजू ।।

-राज कुमार कांदु

अपना जिसको समझा है,
वह न जाने क्यों मौन है।
अपना कहलाने वालों की भीड़ में,
सचमुच अपना कौन है।।

-राज कुमार कांदु

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याद में उनकी तकिया भिगोते रहे,
सच में हर पल हम
उनको ही खोते रहे,
हम तो बदलते रहे
करवटें रात भर ,
चैन से वो तो
रातों को सोते रहे ।

-राज कुमार कांदु

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किताब ए इश्क की दास्तां बस इतनी होती है
टूटता है दिल और आँखें रोती हैं ।
खुशनसीब हैं वो
जिनको उनका प्यार मिला,
बदनसीबों की तो बस
चर्चा ही आम होती है।।

-राज कुमार कांदु

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पत्थर से दिल लगाया,

     ये भूल थी हमारी 

इस भूल पर न जाने,

 हम हँस लें या कि रोएं 

हम तो फिदा हैं उनपर,

  पर कदर नहीं हमारी

फिर क्यों हम उनकी याद में,

     सुख चैन अपना खोएं

-राज कुमार कांदु

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