मुम्बई के नजदीक मेरी रिहाइश ..लेखन मेरे अंतर्मन की फरमाइश ..

निचोड़ लो चाहे जिस्म से, एक एक कतरा खून का ।
हर कतरा तुम्हें पुकारेगा ,
ये सुबूत है मेरे जुनून का ।।

-राज कुमार कांदु

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वक्त का क्या ठिकाना ,क्या सितम कर जाए ।
रंक को राजा बना दे, राजा भी रंक बन जाए ।।

-राज कुमार कांदु

बात करने की फुर्सत नहीं है तुझे ,
दिन रात हम तुझे ही पुकारा करते हैं ।
तेरी तस्वीर दिल में बना ली है हमने ,
चुपके से उसे ही निहारा करते हैं ।।

-राज कुमार कांदु

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तू बेवफा ही सही, पर नहीं दुश्मन मेरी
मेरी हर साँस तेरी अब भी फिकर करती है

-राज कुमार कांदु

खुदगर्ज नहीं देखा ,हमने तुम्हारे जैसा
फनाह हुए तुम्हारे इश्क में हाल भी न पूछा

-राज कुमार कांदु

आतुर हूँ मैं तुम्हें अपना रंजो गम सुनाने को
और तुम कहती हो मुझे खुद को भूल जाने को
अब तो हसरत है निकले दम तेरी ही बांहों में
खोके तुझमें ही भूल जाऊं मैं जमाने को

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#आतुर

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ऊबड़ खाबड़ ,टेढ़ा मेढा
मुश्किल भरा है जीवन पथ ।
सदाचार ,कर्तव्य बना ले ,
सुख से बढ़ेगा जीवन रथ ।।

#टेढ़ा -मेढ़ा

थाम के हाथ मेरा झटकना यूँ गलत है
करके मुझसे वादा भटकना यूँ गलत है
तुम ही हो समाई मेरी साँसों में इस तरह
अब नब्ज दबाना मेरा तेरा यूँ गलत है
#गलत

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शिकवा नहीं है कोई ,न है कोई गीला
मन की सभी ख्वाहिश कभी पूरी नहीं होती
किस्मत जो साथ देती सुन ले मेरे महबूब
तेरे और मेरे बीच ये दूरी नहीं होती
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#गीला

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तीक्ष्ण हैं नजरें और उष्ण है मन
तेरे इसी रूप के दीवाने हैं हम
चंदा चकोर सी है जोड़ी हमारी
तू है शमा तो परवाने हैं हम
#उष्ण

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