શબ્દે શબ્દે જ રચાયો છું કાવ્યની જેમ ચર્ચાયો છું પંક્તિઓ ને સીમા નડે હું તો નિબંધ થવા સર્જાયો છું...

મળે જો કોઈ ને અે 'પાગલ ' રસ્તા પર તો કહેજો અને કે,
ચાતક સમ કોઈ '𝓜𝓪𝓷𝓷𝓪𝓽 ' રાહ જુએ છે હજુ યે તમારી...

-Mamta _મન્નત

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हर वो चीज़ जो बाहर से कठोर दिखती हे वो ज़रूरी नही की पत्थर ही हो
बस नज़रिया चाहिए उसे देखने का फिर प्यारी सी मुरत न दिखे तो कहना..

-Mamta _મન્નત

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मत पूछ मुझसे की कितनी है अहमियत तेरी,

मेरे बनारस से मन में है गंगा सी कीमत तेरी❤️

-Mamta _મન્નત

लोगों के सामने हमेशा हँसने वाले लोग,
जब रब से बात करते है ना
तो रो पड़ते हैं...

-Mamta _મન્નત

लोग पढ़ लेते हैं आंखों से दिल की हालत,
अब मुझसे यु
ग़म की हिफाज़त नहीं होती...

-Mamta _મન્નત

इस कदर वाक़िफ़ है मेरी कलम मेरे जज्बातों से , अगर मे इश्क भी लिखना चाहू तो इन्कलाब लिख जाता हूँ..
-भगतसिंह

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जव मे नही जना चाहती थी उस गलियों मे तब उसी ने कहा था
की क्या सुनाओगी अपने बच्चोंको कहानिया अपनी

और
देखो वो कहानी देकर अधूरी मुझे खुद ही चला गया मेरी कहानी से...😔

-Mamta _મન્નત

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"अगर किसी को मिले वो रास्ते में कही तो मेरा हाल मत बताना उसको कोई
मगर वो ना पूछे मेरे बारे मे
तो मेरी दस्ता उसे सुना देना !!! "

-Mamta _ 'मन्नत...

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कभी कभी हम सोचते है कि यार बहुत बुरा हुआ मेरे साथ!!
लेकिन तुम्हे जो मिला वो तुम्हारे लिए सही ही होता है, फिर चाहे इस से तुम्हे दुःख ही क्यु ना हो किन्तु जो तुम्हारे लिए सही है वो ही तुमको मिलेगा, वो तुम नही जानते लेकिन देने वाला बखूबी जानता है।😇
-Mamta _મન્નત

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लगता हैं अब बुरा ही बनना होगा मुझे!!
तब शायद कोई बददुआ मै मेरी मौत मांग ले !!

-Mamta _મન્નત