मै बाराबंकी में रहती हूं मेडिकल की छात्रा हूं मुझे कविता पढ़ने और लिखना दोनों बहुत पसंद है

मृत्यु ही है जो सच है,
फिर क्यो मारना किसी को,
हालातो को बना कर,
वो मर जाएगा दुवा जिनकी जीने कि दिन रात होती है।

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कितने अचूक शब्दों के ताने मारना,
जब दुःख होने पर ये कहना,
मै ने क्या कर दिया ईश्वर,
हे मनुष्य तेरी यही आदत दुःख का कारण बनती है।
#मारना

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बडे नेक है वो मेहबूब मेरे
सारी दुवाओं को हकमे कर महबूब के
सबकी बात सुनता है तू ए ख़ुदा मेरे,
ये करम कर दे फ़िर हक में महबूब के।

मेरी दुनिया और ये सारा जहान उनसे
बस सारी खुशियां झोली में उन के,।
मेरे ख़ुदा तू परवरदिगार मेरे,
मेरे आंखे और सारे सपने उनके।

कैसा ज़ख्म है जो भरता नहीं
अगर पता देदे सारे गम उनके।
मुझे जीने की वजह दी है,
मेरे हिस्से में कर दर्द उनके।

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मुझमें क्यो घटता नहीं,
मेरा दिल भी सुनता नहीं।
कैसे बांधा है मुझे उसने,
कोई डोर कोई धागा नहीं।

क्या मेरे दर्द की कहीं दावा नहीं
है सबकुछ बस चैन बचा नहीं।
मुझे पता उन्हें प्यार नहीं मुझसे,
मुझे नहीं एसा कभी तो कहा नहीं।

वो भूल जाए तो ये उसका गुनाह नहीं,
ये ईश्क है इसमें कोई बचा नहीं।
ख़तम होना हो जाने दो मुझे,
जब उनको मेरी परवाह ही नहीं।

उसके ना होने पर एसा क्यो लगता है,
जैसे जिंदगी में कुछ बचा नहीं।
एसा है तो ख़तम क्यो ना करता है मुझे,
एसा जीना तो मरना भी बुरा नहीं।

किन तकलीफों से गुज़र होती है मेरी,
इस बात उसको इल्तिज़ा नहीं।
कैसे जी पाता होगा वो मेरे बिना,
जब की कहता था दूसरा कोई तुमसा नहीं।

बड़ी बेपरवाह हो रही हूं आजकल,
ये सोच कर किसी को मेरी परवाह नहीं।
किन सपनों को लगा लू मै गले,
आज तक मै ने कोई सपना बुना ही नहीं।

सारे शहर में शोर है कि वो मेरा है,
मेरे जैसा कोई मुझको मिला ही नहीं।
कितनी तकलीफ़ होती है सोच कर,
जो मेरा था वो कभी मिला ही नहीं।

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हे घट घट वासी बनवासी कल्याण करो,
जो फैली विपदा अब उसका निपाट करो।

तुम सिरोमणी तुम पालक जीवन दान करो,
दर्द है जो कुन्दन बन रहा निष्काम करो।

मेरी जीवन अभिलाषाओं का अंत करो,
दो शांत सुभाव मुझे सुख छाव करो।

मेरी विनती को स्वीकृत जो प्रदान करो,
हो प्रदीपित मेरा जीवन कल्याण करो।

फिर असुमेघ ना कहीं बन्ध जाए,
जो युद्ध हो रहा मन में बाहर ना आए।

मेरे प्रभु एसा अब कुछ कम करो,
जो ही किचित मन उस बलवान करो।
वंदना सिंह

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बहुत सब्रो करम से काम लो,
जिंदगी की सच्चाई जान लो।
उपहास सफलता से जुड़ा है,
उपहास का सही उपयोग कर लो।
#उपहास

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वो जब प्यार का इजहार कर रहे थे,
एक तमाशा मेरे साथ हर बार कर रहे थे।
मै ने कहा था बचा लो मुझे,
हम खो जायेंगे अगर साथ ना मिला,
फिर से दूर हो जायेंगे।
बड़ी सिद्दत से आह भरके बोले वो,
तुम ना कहो ऐसे ना दूर हो अपएंगे।
मेरे दिल को जो थोड़ा आराम हुआ था,
सच जान कर भी झूठ पर उसके इतमीनान हुआ था।
मेरी आंखे जब उसके ख़्वाब में डूबी हुई,
उस रात कुछ एसा काम हुआ था।
अगली सुबह जब वो अपनी बात से मुकर गए,
सारे वादों को कुछ इस कदर भूल गए।
मेरे पास कुछ ना याद दिलाने को बचा था,
सच तो मालूम था बस दिल खफा था।
कुछ इस कदर जब मुझ से दूर हो गए।
सारे ख़्वाब मेरे टूट कर चूर हो गए।
वंदना सिह

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मुझे याद है हर ख़्वाब जो सच हो गया,
मेरी जिंदगी में कोई फिर समिल हो गया।
बड़ी मुद्दत लगी है उसे मुझतक पहुंचने में
आज मेरे ही आसमा का सितार बन गया।

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उसकी ना समझी पर मुझे एतबार है,
थोड़ा मासूम है ढेर सा प्यार है।
वो चांद है मेरा काली रात का,
जो हर समय मेरे सर पर सवार है।

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मेरी बाहों का सहारा उसके लिए,
पागल सारा उनका मेरे लिए।
बड़ा मासूम सा है वो ख़्वाब मेरा ,
मेरी तमाम आंखो का उजाला उसके लिए।

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