Hey, I am on Matrubharti!

એક સંતાન ના મૃત્યુ પછી એના માતા પિતા તથા પરિવાર ની વેદના એક કવિતા રૂપે રજુ કરું છું.

વત્સ કૈવલ્ય

ચડતો સુરજ અચાનક ડૂબી જાય
પડછાયો પણ સાથ છોડી જાય

સમય જયારે અચાનક થંભી જાય
ભવિષ્ય પણ ભૂતકાળ થઇ જાય

જેનું સ્મિત દરેક જવાબ આપી જાય
એનું મૌન આજે એક પ્રશ્ન બની જાય

આપણે જેના ગર્ભ સંસ્કાર કર્યા હોય
એના જ અંતિમ સંસ્કાર આવી જાય

દુઃખના દરિયા વહી જાય
ને ઈશ્વર પરથી વિશ્વાસ ઉઠી જાય

યાદો પણ યાદ મા રહી જાય
એના ગયા પછી આપણે રાહ જોઈએ
કે એ ક્યારે પાછો આવી જાય
ને મૃત્યુ પણ જીવન બની જાય

રચનાકાર :
વેદ ચંદ્રકાન્તભાઈ પટેલ ,24 ગોકુલ સોસાયટી , કડી
મોબાઈલ નંબર - 9723989893

Read More

મધુયામિની


શરમ ને પણ શરમ માં મૂકી
હું બેશરમ થઇ ગયો
એણે ચેહરો હટાવવાની ના પાડી
ને હું ઉઘાડો થઇ ગયો
એનો હાવભાવ મને બધું કહી ગયો
જે શરીર ને પામવાની ઈચ્છા રાખતો તો
આજે હું એ જ શરીર માં સમાઈ ગયો
એના દરેક અંગ ને ગળી ગયો
ને હું જાતે જ પીગળી ગયો
એના શરીર નો દરેક રસ પી ગયો
ને છેલ્લે હું પણ રસ થી ભરાઈ ગયો
રાતે જોર થી આભ ને આંબી ગયો
ને સવારે તો જમીન માં સમાઈ ગયો
હોશે મને જગાડ્યો ત્યારે ખબર પડી
બાકી તો હું બેહોશ જ થઇ ગયો


રચનાકાર : વેદ ચંદ્રકાન્તભાઈ પટેલ , 24 ગોકુલ સોસાયટી , કડી મોબાઈલ નંબર - 9723989893

Dear Readers, This is my most Romantic Poem ever. Please read and take all words in positive way with open mind.

Read More

દિલ નો અવાઝ


મારા દિલ નો અવાઝ સાંભળ
એ તને જ સંભાળે
સાચું કહું છુ વ્હાલી
એ તો મરે
ને જોડે મને પણ મરાવે

તારા ચાલ ની પાછળ દોડે
તારા ઝાંઝર ના અવાઝ માં રણકે
તારા સ્મિત ઉપર વરસે
તને પામવા એ તડપે
ને જોડે મને પણ તડપાવે

તારું દિલ પામવા
મારુ દિલ પલાળે
એ રાત્રે જાગે
ને મને દિવસે ઉંઘાડે

તું હરણ ના જેમ ચાલે
ને એ સિંહ ની જેમ દોડે
એ તડાપ મારે
ને તું શરણાગતિ સ્વીકારે


રચનાકાર : વેદ ચંદ્રકાન્તભાઈ પટેલ , 24 ગોકુલ સોસાયટી , કડી
મોબાઈલ નંબર - 9723989893

Read More

कोरोना का रोना

जब मंदिर मस्जिद पैसो से भरे पड़े हे
तो ये बताओ जुरूरत के वक़्त
अस्पताल क्यों कम पड़े हे

क्या उखाड़ लिया बड़ी बाते केहकर
मेरा देश बिखर गया बिना इलाज देखकर

अस्पताल मैं सहयोग करना है
या अपनी मौत का वियोग करना हे
ये तुजे ही तय करना हे

बीमारी बहार से आयी हे
तुजे अकेले ही लड़ना हे
अपनों के खातिर
तुजे घर में ही रेहना हे

कोरोना को यहाँ रोना ही हे
हर हल में उसे जाना ही हे
क्योंकी ये हमारा संकल्प हे
उसके पास और कोई न विकल्प हे


Stay Home , Stay Safe
Support the Government

कविता के रचनाकार:
वेद चन्द्रकांतभाई पटेल २४,गोकुल सोसाइटी , कड़ी ,गुजरात Mob.-9723989893

Read More

श्री दत्तात्रेय भगवान

त्रिदेव ने अपना अंश बनाया
जो सती के गर्भ में बसाया
वो त्रिदेव के अवतार कहलाये
जिन्होंने चौबीस गुरु बनाये
उसमे पृथ्वी से पिंगला समाये
वो पूर्ण ब्रह्मचारी और अवधूत कहलाये

वेद और तंत्र का विलय करने वाले
ब्रह्मज्ञान का प्रचार करने वाले
गंगा में स्नान करने वाले
गिरनार में ध्यान करने वाले
सह्याद्रि में शयन करने वाले

निसंतान को संतान देने वाले
भक्तो की कामना पूर्ण करने वाले
याद करो तो तुरंत हजार होने वाले
प्रणाम करते हे गुरु दत्त को जानने वाले

जय गिरनारी
कविता के रचनाकार: वेद चन्द्रकांतभाई पटेल २४,गोकुल सोसाइटी , कड़ी, गुजरात Mob.-9723989893

Read More

होली का रंग

रंगो के रंग में डुबजा
एक नए रंग में लिपटजा
मेघधनुष सा बिखर जा
अपने अस्तित्व में सिमट जा

अपने सपनो को रंगने दे
अपनों के साथ भीगने दे
फ़ासलों को मिटने दे
जीवन में रंग भरने दे

मेरा खुदा खेलता था
अपनी प्रेमिका के साथ ,
आज खुद खेलने दे
मुझे अपने वजूद साथ,

लहू का लाल रंग तो बहोत देखा
आज गुलाल का लाल देखने दे

ज़िंदगी रोज़ रंग बदलती हे
आज मुझे भी रंग बदलने दे

कविता के रचनाकार:
वेद चन्द्रकांतभाई पटेल
२४,गोकुल सोसाइटी ,
कड़ी ,गुजरात Mob.-9723989893

Read More

बुढ़ापा बोज नहीं
जोड़ हे इस जीवन का
मोड़ हे एक नए सफर का ,

ये तो निचोड़ हे
जीवन के इन अनुभवों का ,

परिवर्तन का सहज स्वीकार हे
एक नए जीवन का आविष्कार हे ,

जीर्ण तो तेरा शरीर हुआ हे
अनुभवों से तु युवा हुआ हे ,

बहोत परीक्षा ली इस दुनिया ने तेरी
ये बुढ़ापा उसीका जवाब हे

क्यों इतना डर रहा हे
जब तेरा रब तुजे स्वीकार रहा हे

कविता के रचनाकार: वेद चन्द्रकांतभाई पटेल २४,गोकुल सोसाइटी , कड़ी, गुजरात Mob.-9723989893

Read More

ऐ राजनेता

ऐ राजनेता,
तू मुझे जिन्दा लाश न समज
राजनीती का हथियार न समज
मेरी सहनशीलता की गहराई को समज
मेरी अन्दर भभगता लावा समज
तू मेरा कष्ट और मजबूरियों को समज

ऐ राजनेता,
ऐसा नहीं की में शस्त्र उठा नहीं सकता
और तू उतना पागल भी नहीं की
मेरा शास्त्र समज नहीं सकता

ऐ राजनेता,
तू मुझे ,
भविस्य की आस समज
देश की मौन आवाज़ समज
रामराज्य का ख्वाब समज
मेरे संविधान का विधान समज
मेरे परिवर्तन की पुकार समज


ऐ राजनेता,
तू अपने आपको दुष्ट समज
ऐ नासमज अब कुछ तो समज


कविता के रचनाकार: वेद चन्द्रकांतभाई पटेल २४,गोकुल सोसाइटी , कड़ी ,गुजरात Mob.-9723989893

Read More

तू ज्यादा सोच मत
हर पल यु थहर मत
ज़िंदगी जीने के लीए हे
सोचने के लीए नहि

ज़िन्दगी जल्द खतम हो जाएगी
मंज़िल अधूरी रह जाएगी
मुरखो की तरह तू भाग मत
यू उदास होकर बेठ मत
बस तु ज्यादा सोच मत

गलत सोच की वजह से
रास्ता भटक गया हे
सच बताउ
तू पागल सा हो गया हे

बच्चो की तरह सीखता जा
बुढो की तरहा भुलता जा

ज़िन्दगी की सांस लेता जा
सोचने की सांस छोडता जा
तू बस ज़िन्दगी जीता जा

कविता के रचनाकार:
वेद चन्द्रकांतभाई पटेल
२४,गोकुल सोसाइटी ,
कड़ी ,गुजरात
Mob.-9723989893

Read More

भारत की धरती
अध्यात्म की भरती

कृष्ण का जनादेश , जिसमे समाया गीता का आदेश
राम का आदेश , जिसमे समाया रामायण का जनादेश

रजनीश का बोध , कर जीवन की खोज
बुद्ध का बोध , परम शांति को खोज

दयानंद ने सच बताया , सत्यार्थ का प्रकाश दिखाया
हर ईश्वर को एक बताया , नानक ने भी विश्वास जताया

महावीर का उपदेश , अहिंसा का परम संदेश
कबीर का संदेश , गुरुज्ञान का परम उपदेश

वेद को सच मान , प्रज्ञा को परब्रह्म मान
तत्वमसि रूप में , खुद को अहम् ब्रम्हास्मि मान

मीरा और नरसिंह के भजन , करते भक्ति मार्ग का सर्जन
राधा और रुक्मणि के भजन , करते प्रेम मार्ग का विसर्जन

द्वैतवाद जान और अद्वैतवाद जान
अध्यात्म के इस रस्ते में सब निर्विवाद जान

सहज की समाधी , जीवन को जगाती
सम्बोधि का वो फल , सुख देता हर पल

जनक ने अष्टावक्र से पूछा , क्या हे मुक्त होने का रास्ता
अष्टावक्र ने कहा तू मुक्त ही हे , क्यों भटक रहा रास्ता



कविता के रचनाकार:
वेद चन्द्रकांतभाई पटेल
२४,गोकुल सोसाइटी ,
कड़ी, गुजरात Mob.-9723989893

Read More