समाज में दिखाई देने वाली विसंगतियों पर मन में उपजे भावो को शब्दों के रूप में ढालने का शौक कब लेखन में बदल गया, पता ही नही लगा ...... वर्तमान में फेस बुक के विभिन्न समूहो, विशेषकर नया लेखन नए दस्तखत लघुकथा - गागर में सागर और वेब साइट्स ओपन बुक्स ऑन लाइन पत्रिका रचनकार हस्ताक्षर प्रितिलिपि आदि पर लेखन। वेब पत्रिका जय विजय प्रयास सेतु अनुक्रमणिका और अनहद कृति में समय समय पर रचनायें शामिल। कई हिंदी संकलनों का हिस्सा बनने के अतिरिक्त साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशन...........

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इस *राम-कृष्ण* की भूमि पर,
*हर बुराई* को मिटाना होगा।।
*रावण वंश* पर विजय पाने को,
घर-घर में *राम* को आना होगा।।

. . . बुराई से दूर रहने की इच्छा और अच्छाइयों का साथ हमेशा आपके जीवन में बना रहे, इसी कामना के साथ आप को परिवार सहित दशहरा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।

💓 वीर 💓

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#जन्मदिन_06_अक्तूबर
ता उम्र अपने दुःखों को छिपा कर वह मुस्कराता रहा, यहां तक कि जिंदगी के आख़िरी लम्हों में भी। एक सदाबहार मुस्कान 'उसके' वज़ूद का एक अहम हिस्सा हमेशा-हमेशा रही थी।

एक बेहतरीन अभिनेता, बेहतरीन राजनेता से पहले एक बेहतरीन इंसान था वह। दूसरों के लिए कुछ करने का जज़्बा ही उसे अनगिनित लोगों के करीब ले आया था। शायद, इस जमाने के बहुत से 'भौतिक अवार्डों' को तो अपने नाम नहीं कर सका, लेकिन लाखों करोड़ों लोगों की 'मोहब्बतों के अवार्ड' जरूर अपने नाम कर गया वह शख्स।

. . . लाज़वाब कलाकार, अज़ीम शख्सियत और अपने वजूद से जुड़ाव। बस यही थी उसकी संपूर्णता।
कभी न भुलाया जाने वाला शक़्स।
विनोद खन्ना!
Humble Down to our beloved VINOD SIR. . .
❤️❤️❤️❤️ _/\_

/वीर/

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#WORLD_HEART_DAY_SEPT_29

संसार की हर अच्छाई को देखा या छुआ नहीं जा सकता, इसे महसूस किया जा सकता है, सिर्फ #दिल_से

दिल यानि हृदय संसार की सर्वाधिक मूल्यवान वस्तु है, हमारे शरीर के लिए भी और मन के लिए भी. . .
The best way to keep our heart in a healthy state is by eating right, sleeping right and not taking stress.

BEST WISHES OF WORLD HEART DAY. . . 💝💐💝

/वीर/

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#हिंदी_दिवस
विचारों के आदान-प्रदान हेतु हिंदी का प्रयोग, चारो दिशाओं में करना ही काफी नहीं है। हमें हिंदी का गौरव बनाए रखने के लिए इसका प्रारंभ वहीं से करना होगा, जहां से हिंदी का प्रारंभ होता है यानि अ से अनार. . .

हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ

/ वीर /

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#शिक्षक_दिवस

यदि यह कहा जाए आज की शिक्षा पद्धति और शिक्षक; दोनों ही अपने वांछित उद्देश्य के प्रति पूर्णतयः दिग्भर्मित हो चुके हैं, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
वस्तुतः यदि भारतीय संदर्भ में शिक्षा पद्धति का उद्देश्य देखा जाए तो प्राचीन काल से ही शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य संस्कार जनित शिक्षा रहा है। हमारी सभ्यता में प्रारंभ से ही गुरुकुल पद्धति के तहत एक ऐसी शिक्षा का प्रावधान रहा है, जिसमें छात्रों के सर्वांगीण विकास का उत्तरदायित्व आचार्य यानी शिक्षक पर ही रहा है।
'आचार्य देवो भव’ के मूल मंत्र में स्थापित ये प्रणाली गुरु-शिष्य के मध्य न केवल एक स्वस्थ्य संबंध कायम करती थी, वरन आश्रम (शिक्षा संस्थान कह सकते हैं) के परिवेश की सात्विकता का लाभ भी गुरु-शिष्य दोनों को ही होता था, जो एक स्वस्थ्य समाज का मार्ग प्रशस्त करने में भी सहायक था। अब यदि इसके समानांतर आज की शिक्षा पद्दति का आंकलन किया जाए तो सर्वप्रथम; सभ्यता में आया बड़ा बदलाव ही शिक्षा के मूल ढांचे में परिवर्तन लाने के लिए पर्याप्त था।
दरअसल संसार में चहुँ ओर होते विकास के मद्देनजर शिक्षा पद्दति के तरीकों और साधनों में बदलाव का निर्णय गलत नहीं था, लेकिन इस परिवर्तन की बयार में जो भारतीय शिक्षा पद्दति पूरी तरह से पाश्चात्य विचार-आधारित हो गई, यही गलत हुआ। आज हमारी शिक्षा पद्दति पूरी तरह से पाश्चत्य संस्कृति के अनुरूप है। जैसे-जैसे शिक्षा पद्धति पर पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव पड़ता गया, वैसे-वैसे शिक्षा और शिक्षक दोनों ही परिवर्तित होते गए। जहां एक और अब शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल आजीविका और प्रोफेशन तक सीमित हो गया है, वहीं शिक्षक का लक्ष्य भी केवल अपनी जीविका और आर्थिक पक्ष तक केंद्रित रह गया है। परिणामतः आज के शिक्षक-छात्र के बीच गुरु-शिष्य वाला संबंध लगभग समाप्त ही हो गया है। जहां आज का शिक्षक केवल शिक्षा देने की एक यांत्रिक मशीन बन गया है, वहीं छात्र केवल 'एजुकेशनल गैजेट' (शैक्षिक यंत्र) की मातृभारती बनकर रह गया है।
आज की शिक्षा पद्दति भले ही नई पीढ़ी को एक उज्ज्वल भविष्य के साथ एक विस्तृत आकाश देती है लेकिन शैक्षिक तरीकों के चलते आज की पीढ़ी अवसाद ग्रस्त और मानसिक रूप से रुग्ण होने के साथ अपनी जमीन और धर्म से भी विमुख होती जा रही है। इसी संदर्भ में यदि गौर किया जाए तो कमोबेश कई धर्मों में आज भी शिक्षा के साथ धर्म-शिक्षा व्यवस्था का चलन है। भले ही एक नज़र में यह पूर्णतयः तर्क संगत नहीं लगता लेकिन कुछ संस्कार से जुड़े बिंदुओं पर इसके महत्व को नकाराना सहज नहीं हैं। जरूरत है कि आज शिक्षक दिवस जैसे विशेष दिन पर इस बारे में अवश्य ही विचार किया जाए। वस्तुतः जरूरत है वर्तमान में; शिक्षा संस्थानों में शिक्षा के साथ किसी दिन विशेष आदि पर या अतिरिक्त समय में ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की, जहां भारतीय संस्कृति, सभ्यता से जुड़ा मार्गदर्शन उपलब्ध करवाया जाए जो न केवल गुरु-शिष्य दोनों के लिए शिक्षा पद्दति के वास्तविक उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायक हो, बल्कि उनके आपसी संबंधों में भी मधुरता ला सके।


हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

// वीर //

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लफ्ज़ों की कमी हो गई है, हमारे
पास. . .
वरना काबिल-ए-तारीफ के लिए तो
बहुत कुछ है जहां में । H∆V€ ∆ NI¢€. D∆¥ 🙏🏻

-VIRENDER VEER MEHTA

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अगर कोई सोचता है कि हम बहुत समझदार हैं, तो ये ठीक हो सकता है, ये उसकी राय है। लेकिन अगर हम सोचते हैं कि हम बहुत समझदार हैं, तो इसका अर्थ है कि हम बिल्कुल भी समझदार नहीं हैं।

शुभ प्रभात. . . 💐💐

/वीर/

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74वां_स्वतंत्रता_दिवस
आज़ादी के मायने. . . पूर्णतयः नैतिक भावना के साथ देश, समाज और परिवार के प्रति संपूर्ण आत्मसमर्पण।

हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
/वीर/
❤️🇮🇳🇮🇳❤️

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किसी ने कल मनाया तो कोई आज मना रहा है,
'कान्हा' तेरे आने की खुशी हर भक्त मना रहा है।

तेरे दर्शन की प्यास है हर मन में हर क्षण अब तो,
कब दोगे दर्श प्रभू हर मन यही आस लगा रहा है।

💞 शुभ कृष्ण जन्माष्टमी 💞

🚩।।जय श्री कृष्ण।।🚩
🌿 🐚🐚🐚 🌿
/वीर/

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गोकुल मथुरा वृंदावन और द्वारका रहा निवास।
शत्रु संग भी खेल किए, ग्वालन संग रसाए रास।।
देवकी-घर जन्म हुआ, और यशोदा कहाई मैया।
चक्रधारी संसार के, हैं यही सांवरे कृष्णा-कन्हैया।।

💞 शुभ कृष्ण जन्माष्टमी 💞

🚩।।जय श्री कृष्णा ।।🚩
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/वीर/

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