Hello, I’m a published author, book named Dhundhalee Tasveeren (A collection of poems). I’m also a Software Engineer.

एक ख़्वाब दिखा दे सजना,
कि रात में तेरी बाँहें और,
सिर्फ़ ये बिस्तर हो अपना,
एक ख़्वाब दिखा दे सजना।

इन रंग में डूबीं जाए,
वो रंग में मैं रंग जाऊँ,
तेरा नाम लिख-लिख कर,
बादल संग भिजवाऊँ।

एक ख़्वाब दिखा दे सजना...

रास्ता तेरा ताकूँ,
फिर थककर मैं सो जाऊँ,
द्वार पर तेरे आने का,
आहट सुन चली आऊँ।

एक ख़्वाब दिखा दे सजना...

भीगे बदन पर मेरे,
तू भी लिपट जायें,
कुछ मेरी ख़ामोशी में,
तू भी ख़ामोश हो जायें।

एक ख़्वाब दिखा दे सजना...

रात का चंदा जब भी,
तारो से शर्मायें,
तू उनको भी मेरा,
नाम झूम के सुनायें।

एक ख़्वाब दिखा दे सजना...

आँखे जब भी मेरी,
अस्क़ो से भर जाएँ,
उन आवो को तू तेरे,
होठों से सरकाएँ।

एक ख़्वाब दिखा दे सजना...

बातें मेरी जब भी,
थोड़ी काम पड़ जायें,
तू अपनी चादर को,
मेरी ओर बढ़ायें।

एक ख़्वाब दिखा दे सजना...

सो जाऊँ मैं जब रातों को,
तू सपनो में आयें,
ना सोयें ना सोने दे,
यूँही मुझे जगायें।

एक ख़्वाब दिखा दे सजना...





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ये कौन-सी रेत है जो उड़ा रहीं है मेरी ख़ुशी,
आइना ला कर दे, पता नहीं क्या है बेरुख़ी।

परवाना यूँ ही कहाँ रात-भर रहता है दुःखी,
कोई अपना ही होगा, जिसे देता है रोशनी।

कर भी क्या सकता, मेरा ख़्वाब, है ऐ-खुदा,
वो बैठें है ज़मीं पर, जिसे इल नहीं आयत-की।

ज़रा जा कर देख आ कहाँ छिपा हैं वो पल,
जो यहीं था, बेख़बर थीं जिससे मेरी ज़िंदगी।

एक लम्हा जो खो गया कहीं हैं देख ‘विनय’,
अब शिकवा हैं, और श्याहि है शमशीर-सीं।

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