Hi, Thank you for visiting my Profile, I am Prashant Vyawhare, I Love Writing and Reading, that's why I am hear on Matrubharathi to write for reading lovers & follow Esteemed Writers.

ख्वाबो के समंदर से खुशियों के मोती ढूंढ रहा हु मैं !
अगर मिल जय कोई रंगीन पत्थर तो भी मुस्कुरा रहा हूँ मैं !
पत्थर ही सही मगर पा कर दिल खुश है मेरा !
बाट दू उसे किसी दोस्तो को यू ही, क्युकी वही अनमोल मेरे पलो का है सहारा !

हैप्पी फ्रेंडशिप डे !

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धुप में मुश्किलों की जल रहा हूँ में !
छाव दीखे न कही और मंझिल भी बेनज़र है !
फिर भी बढे चला हूँ !
जान कर ये अनजान सफर है !
आंधीयो की काँटों भरी राह है
आजमाऊ कौन इस पल साथ निभाए !
हमसफ़र तो है कई
पर साथी-ऐ-ईमान कोई मील जाये !

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इस भीड़ में शहर की !
खोने नहीं आया हूँ में !
ख्वाब है कई और !
कुछ कर गुजरने का है हौसला !
आजमाऊ खुद को चाहे तूफ़ान कोई आये दुखो का !
दम भर चला हूँ खुद में जूनून जितने का !

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मुश्किलें चाहे कितने भी हो गर्द !
हौसला ही है हमारा दम !
चक्रव्यूह दुखो का अब !
तोड़ एक दिन दिखा तुम्हे देंगे हम !
चाहे असहाय दोस्त भी हो कभी !
मगर खुदी न हमारी मायूस है !
आखिर पंखो से अपनी आप उड़ान !
खुदा को भी तो पसंद है !

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आज फिर मुश्किलों के बादल !
चारो तरफ आये है भर !
तूफ़ान लहराए दुखो का !
गम में डूबे है सभी दर !
मगर इनसे हमे न है घबराना !
हौसल ए दामन को है बांधना !
इन दुखो से साथ मिलकर लडे हम !
है मुश्किल रास्ता गर !
चाहे दुश्मन भी है दम भर!
तय कर लिया हमने भी के !
एक दिन सुखो का सूरज बन !
इस अँधेरी दुनिया पर बरसे हम !

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रामायण, महाभारत और शक्तिमान दूरदर्शन पर वापस आया है !

काश के वो मेरा बीता बचपन भी आ जाता तो मजे ही अलग थे !

Life have taken a Stop !

Nobody knows its temporary or Full Stop !

Hope & care is now having must !

Let's fight till the last !

"कोरोना" तो एक बहाना है

इस ईश्वर की बनाई प्रकृति को ये दीखाना है !

के ऐ इंसान मत कर इतना घमंड

तू भले ही चाँद पर चला जायेगा !

मगर इस प्रकृति के एक नन्हे से जीव भी !

तू मात खायेगा !

#StayHomeStaySaveSaveOthers

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#StayHomeStaySafeSaveOthers

"Korona" Ab Bhag bhe Jao Na

Pareshan Ho Gayee Duniya Ab to

Jara Chale bhe jao ba

अँधेरे रास्तों पर में चले चलता रहा ! उमीदो के दामन थामे भटकता रहा !

दिल में सजाये सपनो की करते हुए तलाश ! कभी गिरते तो कभी संभालते हुए !

हर पल मंज़िल की आस संजोये ! जिंदगी का गीत गुनगुनाता रहा !

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