Hellow, Thank you for visiting my Profile, I am Prashant Vyawhare, I Love Writing and Reading, that's why I am hear on Matrubharathi to write for my Dear Readers & follow Esteemed Writers.

सूरज की रोशनी इंसान में फरक ना करे !
तो इंसा क्यों करता है भला !
जब खून का रंग सभी का लाल ही है !
तो इंसान की जमात अलग क्यों है भला !

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जिंदगी का सफर चलकर तो देख !
दुख का कड़वा घूँट जरा पी कर तो देख !
मजा तो ऐसी ही जिंदगी जीने में है
जहा सुखो की बारिश दिल में जगी हो !
चाहे रास्ता कितना भी काँटों से भरा हो !

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आज कल कमी हुए है इंसानो की इस दुनिये में !
हां खुद्दार मगर हर कही मिल जाये !
वो बनाने वाला भी इंसानो को, सोच में होगा के !
ये क्या बेखुदी मुझसे हो गयी !

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उम्र वालो को ना नजरअंदाज करना दोस्तों !
बाल उनके ऐसे ही न सफ़ेद हुए है !
ए जवा कभी बैठ संगत में उनकी !
जो दुनिया भर का ज्ञान जो संजोये बैठे है !

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नेताजी : भाईयो हमने आप की सिटी को स्मार्ट सिटी किया है !
एक सज्जन : माननीय सब जगह तो सिर्फ आप के द्वारा उद्घाटन के बोर्ड ही चमक रहे है, बताइये, अब इसमें आप स्मार्ट बन रहे है या शहर !
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कभी कभी कुछ बोलने के सिवा,
खामोश रहना ही हमारी सेहत के
लिए ज्यादा अच्छा होता है !

To All

Life is Like A Canvass, we must choose to Paint it with Peace and Happiness!

Tea and Biscuits
are like Friends Forever! Both Makes us more Happy when we found them Together!

Moon looks Different Every Evening
So our Life Is!