मैं कथानक ठहरा हर कहानी का

मेरी खामोशियां

जाहिर कर दिया करिए...
अंतः की सुगबुगाहट को।
वो मन की पीड़ा को...
उस तन की मुस्कुराहट को।।
शब्दों से भावनाओं के धागे में गह दिया करिए...
रखकर साथ, नहीं ले जा पायेंगे उस निर्देशक के पास।
जो रखता नहीं है किसी अजनबी अपने से आस...
अच्छा यही होगा उस शोर को कह दिया करिए।।

-सनातनी_जितेंद्र मन

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कहने में क्या जाता है, चुप रहकर भी क्या पाता है।
ये इंसानी फ़ितरत भी बड़ी अजीब है..किसी को समझ न आता है।।

-सनातनी_जितेंद्र मन

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चल सुना ही ले अब तु भी अपनी...

हर्ष कार्य के प्रारंभ में नहीं बल्कि पूर्णता पर ही हो तो मानव के लिए श्रेयस्कर होता है

-सनातनी_जितेंद्र मन

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मन की बातें मन में ही रखना पड़ता है जब तक काम न सर जाये, एक से दो हूआ तो अवरोध उत्पन्न हो आता हैं।

-सनातनी_जितेंद्र मन

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✊✊👉💪💘

व्यक्त करूं क्या??

माफ करो

वो तेरा सोच कर मिटाना भी ये जताता है..
भावना इस मासूम मन के प्रति तुझमें भी है

-सनातनी_जितेंद्र मन