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वरमाला जैसे पवित्र कार्य का बनाया जा रहा है मजाक

आजकल शादियों में ये बात काफी नजर आ रही है, कि शादी के समय स्टेज पर वरमाला के वक्त वर या दूल्हा बड़ा तनकर खड़ा हो जाता है, जिससे दुल्हन को वरमाला डालने में काफी कठिनाई होती है, कभी कभी वर पक्ष के लोग दूल्हे को गोद में उठा लेते हैं, और फिर वधु पक्ष के लोग भी वधु को गोद में उठाकर जैसे तैसे वरमाला कार्यक्रम सम्पन्न करवा पाते हैं, आखिर ऐसा क्यों? क्या करना चाहते हैं हम? हम एक पवित्र संबंध जोड़ रहे हैं, या इस नये संबंध को मजाक बना रहे है, और अपनी जीवनसँगनी को हजार-पांच सौ लोगो के बीच हम उपहास का पात्र बनाकर रह जाते हैं, कोई प्रतिस्पर्धा नही हो रही है, दंगल या अखाड़े का मैदान नही है, पवित्र मंडप है पवित्र अग्नि का आवाहन होता है भगवान् श्रीराम ने सम्मान सहित कितनी सहजता से सिर झुकाकर सीता जी से वरमाला पहनी थी?
रामो विग्रहवानो धर्म:।
यही हमारी परंपरा है। विवाह एक पवित्र बंधन है, संस्कार है, कृपया इसको मजाक ना बनने दे।
।। जय श्री राम !!
🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼

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”जिन्दगी की दौड़ में,
तजुर्बा कच्चा ही रह गया...।"

" हम सीख न पाये 'फरेब'
और दिल बच्चा ही रह गया...।"

"बचपन में जहां चाहा हँस लेते थे,
जहां चाहा रो लेते थे...।"

"पर अब मुस्कान को तमीज़ चाहिए,
और आंसुओ को तन्हाई..।"

"हम भी मुस्कराते थे कभी बेपरवाह, अन्दाज़ से..."
देखा है आज खुद को कुछ पुरानी तस्वीरों में ..।

"चलो मुस्कुराने की वजह ढुंढते हैं...
तुम हमें ढुंढो...हम तुम्हे ढुंढते हैं .....!!"

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जब बेटी घर से निकलती है तो लोग कहते हैं।
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1. छोटे कपडे पहन कर मत जाओ ,
पर अपने बेटे से नहीं कहेंगे, कि नज़रों मैं गंदगी
मत लाओ।

2. लोग अपनी बेटी से कहते हैं, कि कभी घर कि
इज्जत ख़राब मत करना
लेकिन कभी बेटे से क्यों नहीं कहते ,कि किसी के
घर की इज्जत से खिलवाड़ नहीं करना ।

3. हर वक़्त रखते हो नज़र बेटी के फ़ोन पर,
पर ये भी तो देखो, बेटा क्या करता है इंटरनेट पर ।

4. किसी लड़के से बात करते देखकर ,
जो भाई हड़काता है वो ही भाई अपनी गर्लफ्रेंड
के किस्से घर में हंस हंस कर सुनाता है .

5. बेटा घूमे गर्लफ्रेंड के साथ तो कहते हो
अरे बेटा बड़ा हो गया .
और बेटी अपने अगर दोस्त से भी
बातें करें तो कहते हो बेशर्म हो गयी
इसका .. दिमाग ख़राब हो गया ।

6. पहले शोषण घर से बंद करो
तब शिकायत करना समाज से कीजिये...

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