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Writer, poet, storyteller, Blog ; yogitawardeblogs.com

खेलते-कूदते हुए वो सपने जो अभी बड़े नहीं हुए,
कोई गिरता हुआ, कोई संभलता हुआ,
अपनी अपनी कहानी को गढ़ता हुआ,
अपनी मस्ती में चूर..
ना कुछ खोने का ग़म ना पाने का,
फिर भी चेहरे पर ख़ुशी लिए,
गिरकर संभलना फिर चलना,
एक नयी कहानी लिए,
यही है बचपन, जो एक बार जीना है..

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अख़बार की ख़बर....

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