Author: “साही ‘&’ सुधीर” http://bit.ly/amazon-saahiandsudhir Blog ; yogitawardeblogs.com

“अपने सपनों को मरने मत दो,
वरना वो तुम्हें ज़िंदगी भर सोने नहीं देंगे!!”
-Yogita Warde

ज़िन्दगी’ हो या ‘शतरंज’
जीतता वही है जिसने,
दिल से नहीं दिमाग़ से खेला हो!!
— Yogita Warde

चलो थामे उन लफ़्ज़ों को,
जो तन्हाइयों में भटक रहे...
—Yogita Warde

“अधूरे सपनों को,
शिद्दत से तलाश रहे होते है..
‘वही लोग’ सपने पूरा होने पर
दूसरों के दिलों में ‘सुराख’ बना लेते हैं...”
—Yogita Warde

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वक़्त बेवक्त सा हो चला,
अब न करता किसी की परवाह,
ज़िंदगी छोटी होती गई!
हम सोशल नेटवर्किंग से जुड़ते चले गए!
जाने अनजाने वक़्त के साथ
दोस्त बढ़ते चले गए,
दोस्ताना घटता चला गया!!
—Yogita Warde
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मेंने छुपा रखा है तेरा लिबास,
रिश्तों से धोता रहा उसे हर बार!
करता इस्त्री बार-बार,
फिर भी पड़ते रहे सल उस पर बार-बार,
क्या इसी तरह मिटती हैं दूरियाँ हर बार,
आसान होते गर रिश्तों के कपड़े बदलना
तो क्या उसे हम बदलते हर बार ??
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धागे का हक़दार

पेड़ सरसरा रहे थे, कलकल बहती हुई नदी के साथ हवाएँ भी अपना रस घोल रही थी।
वहीं नदी किनारे कोई बैठा था, एक लड़का एक लड़की, वह भाई बहन थे, दोनों अपनी ज़िंदगी को कहीं दूर ले जाते हुए, अपने भविष्य की कल्पनाओं में थे, इस मौसम के साथ, जीवन की उन अनगिनत गणनाओ को लेकर जो अभी शुरू भी नहीं हुआ था।
‘हम जीवन में चाहे उम्र के किसी भी पढ़ाव पर हों, सपने हमें हमेशा नई उड़ान देते है..’
बातों बातों में वे नदी के दूसरे छोर तक जाने की बातें करते, कभी यहाँ तो कभी वहाँ..
भाई कहता मैं इस नदी को उड़ कर पार कर लूँगा, पर बहन कहती है ‘मैं तो नीचे से ही जाना चाहती हूँ, तैरकर।’
भाई - क्यों तुम्हें आसमान में उड़ना पसंद नहीं है?
बहन - पसंद तो है, मैं भी आसमान में पंछियों की तरह उड़ना चाहती हूँ।
भाई - तुम डरती हो ?
बहन - नहीं, में किसी से नहीं डरती।
भाई - तो फिर..
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Written By Yogita Warde
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https://www.yogitawardeblogs.com/2019/08/blog-post_14.html

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