Hey, I am on Matrubharti!

चले अगर सांस तो वजह तुम हो,
दील के हर एक धडकन की ख्वाहीश तुम हो...
चांद तो हर रात का नजराणा होता है,
लेकीन मेरे हर एक लम्हे का चांद तुम हो...
कार्तिक हजारे

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असू दे हात,हातात माझ्या,
कळू दे जगास,तू डोळ्यास माझ्या..
नसे विरह इथे क्षणाचाही,
जळू दे प्रत्येकास प्रेमास माझ्या...
कार्तिक हजारे...

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सोचना क्या है उसने तो तिर मारा था दील मे...
लेकीन दर्द तब भी नहीं हुंआ जब दील के तुकडे हूये...
सिर्फ एक ही लब्ज बोला उसने की,
दील तुटने के बजाय दील ही निकालकर चल दिये...

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हवा की लहरे ये बयान कर रही,
उसके पाव की छनक कानो मे गुंज रही...
हर वक्त रहता था दील मे खयाल उसका,
आज हांथो की खनकाहट ये दुरी बयाण कर रही...

कार्तिक हजारे

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काय अदा आहे तुझी,
नितळ तुझ्या लाजण्यात...
बघ सागरही कसे गहिवरले,
पाहून बेभान तुझ्या रुपात..