समझता ही नहीं वो मेरे अलफ़ाज़ की गहराई मैंने हर लफ्ज़ कह दिया जिसे मोहब्बत कहते है.....

मकतब _ऐ_ इश्क से
कोई वाकिफ नहीं
पा लेना ही इश्क नहीं
फना हो जाना
भी इश्क है....

-Zainab

एक हम है
जो इश्क की बारिश करते है
एक वो है
जो भीगने को तैयार ही नहीं है....

-Zainab

मेरे एहसासों को में
भी अलफाज देना चाहती हुं

में दिल से काम लेती हुं
बस यहीं हार जाती हुं...

-Zainab

सुकून बस इतना ही काफी है
जिंदगी में यारा....
फासलों में रहकर भी
तू दिल के
सबसे करीब है....

-Zainab

तुम क्या हो मेरे लिए....
जिसे पढ़ते पढ़ते सारी उम्र
बीत जाए वो
नायब किताब हो तुम 💕
इस मतलब की दुनिया में
बेमतलब सा ख्वाब
हो तुम 💕
मेरे बेजवान एहसासों का
जो कोई ना समझ सके
वो जवाब हो तुम 💕

-ZainabMakda

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