Creative Writer, Poet.

शब्दों की गहराईयो में ख़ुद को तराश क़र देखा हैँ, बेखालिया हीं थीं जिनको ख्यालो से निचोड़ कर फेंका हैं | ख़ुश हैं हम अपनी दुनिया में, बस कुछ उम्मीदेँ थी लोगो से उनको भी आज़मा कर देखा है | Zeba Praveen

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"लिखावटों तक खुद को समेट रखा हैं, फैसला मेरा नहीं, दिल ने ही तय कर रखा है | छुपाने की आदत कहा, बस खुद को अपने तक समेट रखा हैं l लबो की गुज़ारिश थी, शब्दों में बया करने की, लेकिन शब्द भी कह गया मतलब तो समझाना तुम पर ही छोड़ रखा है |"

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https://youtu.be/28Ge8IPAwB0

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जो लब न कह सके उसे आँखों ने बया कर दिया,
छुपाने की कोशिश तो की थी लेकिन धड़कन ने शोर मचा दिया | 
एहसास ही तो थे जिसे बया ना कर सके,
लेकिन ख्यालो में  खुद को तबाह कर दिया |

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"तन्हाई के बादल थे और अल्फाज़ो की बारिश थी, वो बरसे ऐसे जैसे बिजली सी आहत थी, लफ्ज़ो पर फिर भी ख़ामोशी थी लेकिन दिल में एक आहट थी के यह तो होना ही था क्यूंकि यह तो बिन मौसम बरसात की शरारत थी"

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