बंदिशों से मुफ़लिस और लिहाज़ से नकारा हूँ, रिश्तों से फ़क़ीर औऱ मिज़ाज़ से शरारा हूँ, मुझसे मेरे आशियाँ का पता मत पूछो ऐ दुनिया वालों, मैं मज़हब से मुसाफ़िर और फ़ितरत से आवारा हूँ.!

मुझे बहुत परखा़ गया,

लेकिन समझा न गया.

उसके दरवाज़े पर दस्तक तो नही दी लेकिन,

अपनी खामोशियाँ दहलीज़ पर छोड़ आया हूँ.!

वो जिसकी याद में ख़ुद से रहता हूँ बेख़बर,

ख़बर उसकी कोई मुझे एक मुद्दत से मिली नहीं.!

बेहाल है, बेज़ार है, एक मुद्दत से नासाज़ है,

ये दिसम्बर का महीना यार की बाहों का मोहताज़ है.!

ઓય સાંભળ તું ભલે.. ક્યારેક આટલા જ જવાબ આપતી હોય.. Hm, Ohhh, Ok, By, Gm & Gn.. પણ હુ તારા જવાબના ઈંતઝાર મા બસ એક નજરે રાહ જોઈ ને બેઠો રહુ છું. અને તુ મારો જવાબ જોયા વગર offline થઈ જાય છે. આમ મારા મેસેજ ignore કરવાની આદત પડી ગઇ છે તને. પણ સાંભળ સાચુ કહું તને. પ્રેમ તો તને પણ છે બસ તૂ એ કબૂલ નથી કરતી..😔

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सुनो

माना कि मोहब्बत बेइंतहा है तुमसे,

पर ज़रूरी तो नहीं हर बार इसकी नुमाइश करूँ.!

सुनो,
तुम्हें एक आख़िरी दफ़ा
मैं मिलना चाह्ता हूँ..

जहाँ मेरी ज़ुबां खामोश हो
और
तुम मेरी धड़कनों का शोर सुन सको.!

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The harder you work for something,

the greater you’ll feel when you finally achieve it.

सुनो रंज ये नहीं कि तुम भूल गये हों मुझको,

उफ़ दर्द ये है कि तुम अब भी मुझे हूबहू याद हो ॥

कभी कभी तो लगता है ज़िन्दगी है वो,

जितना भी जी लूँ कम हि तो है.!