बंदिशों से मुफ़लिस और लिहाज़ से नकारा हूँ, रिश्तों से फ़क़ीर औऱ मिज़ाज़ से शरारा हूँ, मुझसे मेरे आशियाँ का पता मत पूछो ऐ दुनिया वालों, मैं मज़हब से मुसाफ़िर और फ़ितरत से आवारा हूँ.!

अजी छोड़ भी दो ये अपना ढोंग पुराना,

मैं आज भी लबों से ज़्यादा आँखें पढ़ता हूँ।।

-मनमौज़ी

अब जो होठों ने बयान कर दी है सच्ची,

#मोहब्बत ♥️

तुम चूम कर इनको, झूठा ही कर दो।

-मनमौज़ी

इज़हार मुश्किल है, ये जानता हूँ मैं...

और उसने नज़रें भी न मिलाई,
जो आंखें पढ़ लेता।।

मनमौज़ी

सुनो तुम तक पहुँचने में लगे हैं बरसों,

क्या दिल तक पहुँचने में ज़मानें लगेंगे॥

👉 मनमौज़ी

सुनों अगर मुझ से इश्कहै,



तो अपना ख्याल रखना तुम..

👉 मनमौज़ी

मैं कैसे मान लूँ कि इश्क़ बस एक बार होता है

तुझे जितनी दफ़ा देखूँ मुझे हर बार होता है

-मनमौज़ी

ख़ुश रखूँगा मैं हमेशा ये अहद मुश्किल है,

हाँ मगर इतना है वादा कि रुलाऊँगा नहीं।।

👉 मनमौज़ी

सुखाई जा रही है जुल्फ़ धोकर,

घटा या ' नी निचोड़ी जा रही है।।

👉 मनमौज़ी

फिर मेरी नींद, मेरा सुकूँ
उसने सब तबाह कर दिया,

उसके लब चूमकर
आख़िर, ऐसा क्या गुनाह कर दिया.!

》मनमौज़ी《

यकीं रहता भी
तो कैसे रहता मोहब्बत पे,

कि हमने जब भी देखा उसे
किसी ग़ैर की बाहों में देखा.!

》मनमौज़ी《