Vrajesh Shashikant Dave Books | Novel | Stories download free pdf

अन्तर्निहित - 34

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 156

[34]शैल ने सारा के साथ आश्रम में प्रवेश किया। संध्या हो चुकी थी। आश्रम में विशेष गतिविधियां नहीं दिख ...

अन्तर्निहित - 33

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 276

[33]गहन सांस लेकर वह बोली, “यह गांधी का देश है। मेरी बात सुनकर तुम्हें बूरा लग सकता है। संभव ...

अन्तर्निहित - 32

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 618

[32]“विभाजन के साथ ही प्रारंभ हुआ स्थानांतरण। लाखों लाखों लोग अपने स्थायी स्थान को छोड़कर अच्छे और सुरक्षित भविष्य ...

अन्तर्निहित - 31

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 585

[31]सोनिया और राहुल ने मीरा घटना के सभी कागजों, फ़ाइलों, चित्रों, रिपोर्टों, चलचित्रों आदि का अभ्यास प्रारंभ कर दिया। ...

अन्तर्निहित - 30

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 702

[30]‘शैल को गए इतना समय हो गया। अभी तक नहीं लौटा। क्या कभी नहीं लौटेगा?’‘संभव है सारा, सब कुछ ...

अन्तर्निहित - 29

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 1.1k

29]“आप?” दोनों ने एक साथ पूछा।“हाँ, मैं। इतने दिनों के समय में आप के पास कोई ठोस प्रमाण नहीं ...

अन्तर्निहित - 28

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 852

[28]“तो अब आप पदयात्रा पर जाना चाहते हो श्रीमान शैल?” अधिकारी ने व्यंग रचा। शैल ने उस व्यंग को ...

अन्तर्निहित - 27

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 930

[27]“घटना स्थल पर भी कुछ नहीं मिला, शैल?”“मिलता भी कैसे?”“क्यों?”“वह स्थल घटना स्थल है ही नहीं।”“क्या कह रहे हो? ...

अन्तर्निहित - 26

by Vrajesh Shashikant Dave
  • (4.9/5)
  • 897

[26]“दो दिन से हमने कुछ भी नहीं किया है। इस प्रकार बैठे रहने से तो कार्य आगे बढ़ेगा ही ...

अन्तर्निहित - 25

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 1.4k

[25]शैल के फोन की घंटी बजी, “महाशय, यहाँ वत्सर के मंदिर से सारे पत्रकारों को तो वत्सर ने भगा ...