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महिला पुरूषों मे टकराव क्यों ? By Captain Dharnidhar

आपने एक खेल कभी अपने बचपन मे खेला होगा दो दल बच्चो के बनाये जाते है एक दल घोड़ी बन जाता है दूसरे दल वाले उनकी पीठ पर बैठ जाते हैं फिर एक बच्चा पूछता है "धींगा ऊपर कौन चढ़ा ? चढ...

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કાંતા ધ ક્લીનર By SUNIL ANJARIA

સવારનાં કિરણો હોટેલ 'ટ્રાવેલર્સ હેવન ' નાં ફ્રન્ટ ડોરના કાચ પર જાણે બીજો સૂર્ય ઊગ્યો હોય તેવું પ્રતિબિંબ રચી રહ્યાં હતાં.

કાચના ચકચકિત ડોર પર સફાઈદાર, કડક ઈસ્ત્રી કરેલા...

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અંધારી આલમ By Kanu Bhagdev

આશરે પીસતાળીસ વર્ષની વય ધરાવતો શેઠ રતનલાલ જાબી જેટલો શરીફ, ઈમાનદાર, ભલો અને પરગજુ દેખાતો હતો, અંદરખાનેથી તે એટલો જ ક્રૂર, ઘાતકી અને કાળા કલેજાનો કાતિલ હતો. પરંતુ હમેશા ચહેરાઓ જ માણ...

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ए पर्फेक्ट मर्डर By astha singhal

खिड़की गांँव के उस छोटे से पुलिस स्टेशन में एक खामोशी सी छा गई जब अमोल ने इंस्पेक्टर यादव पर चीखते हुए कहा,"मैं बारह घंटों से इस पुलिस स्टेशन के चक्कर काट रहा हूँ पर आप हैं कि...

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ब्लॅकमेल By Abhay Bapat

“सर, आपल्या रिसेप्शन मधे एक तरुणी आल्ये, तुम्हाला भेटायला. पण ती आपलं नाव सांगायला तयार नाहीये.” सौंम्या पाणिनीला म्हणाली.
“ मग हाकलून दे तिला.” सौंम्याकडे न बघताच पाणिनी म्हणाला....

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लागा चुनरी में दाग By Saroj Verma

शहर का सबसे बड़ा वृद्धाश्रम जिसका नाम कुटुम्ब है,जहाँ बहुत से वृद्धजन रहते हैं,उनमें महिलाएंँ और पुरुष दोनों ही शामिल हैं,सभी हँसी खुशी उस आश्रम में रहते हैं,किसी वृद्ध महिला को उसक...

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गुलकंद By श्रुत कीर्ति अग्रवाल

मैं, एक लेखिका, श्रुत कीर्ति अग्रवाल, आज पहली बार आपके साथ अपनी रचनाओं के माध्यम से नहीं, स्वयं अपने-आप को माध्यम बना आपके समक्ष हूँ। अभी तक मुझे लगता था कि अगर मैं अपनी सारी बातें...

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उन्हीं रास्तों से गुज़रते हुए By Neerja Hemendra

मुझे अपना यह नया उपन्यास " उन्हीं रास्तों से गुज़रते हुए " पाठकों को समर्पित करते हुए अत्यन्त प्रसन्नता हो रही है। मेरे इस उपन्यास का कथ्य यद्यपि समकालीन न होते हुए अब से लग...

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એક ષડયંત્ર... By Mittal Shah

નમસ્કાર વાચક મિત્રો,
આપના મળેલા પ્રેમ બદલ હું ખૂબ ખૂબ આભારી છું. આ વખતે હું એક નવી નવલકથા લઈ તમારી સમક્ષ ઉપસ્થિત થઈ છું. જો કે મેં તો દર વખતે મારી નવલકથા રહસ્યમય કથા કે સામાજિક કે...

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Shyambabu And SeX By Swati

श्यामबाबू ने रात के आठ बजे दिल्ली के रेडलाइट एरिया में सड़क के किनारे, कोई कोना देखकर अपनी गाड़ी पार्क की और दस मिनट तक गाड़ी मेंही बैठा रहा और बैठे-बैठे यही सोचता रहा कि उसके जि...

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