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मेरा काम हो गया - एक जागृति कथा

by prem chand hembram
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पुरुलिया जिले के रूकनी गाँव के समीप हारु कमार का घर था। मिट्टी की दीवारें, फूस की छत और ...

आलसी रामू

by prem chand hembram
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आलसी रामूएक छोटे-से गाँव में रामू नाम का एक आदमी रहता था। शरीर से वह हट्टा-कट्टा और मजबूत था, ...

क्या दीक्षा आवश्यक है ?

by prem chand hembram
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जयगुरु क्या दीक्षा आवश्यक है? — शास्त्र, संत और मानवता की दृष्टि से एक विचारभारतीय सनातन आध्यात्मिक परंपरा में ...

AI का विकल्प

by prem chand hembram
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AI का विकल्प : क्या प्राचीन भारत में चेतना-आधारित बुद्धिमत्ता की कोई परंपरा थी?मानव सभ्यता आज एक ऐसे युग ...

समस्या नहीं , समाधान की चर्चा

by prem chand hembram
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समस्या नहीं, समाधान की चर्चाजड़ों को सींचने की आवश्यकतासमाज की अनेक समस्याओं पर बहुत कुछ लिखा जा चुका है—नारी ...

शिक्षा नहीं , मनुष्य निर्माण

by prem chand hembram
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शिक्षा नहीं, मनुष्य निर्माणविज्ञान, विद्या और चेतना का समन्वयआज मानव सभ्यता अपने इतिहास के एक ऐसे मोड़ पर खड़ी ...

अभी नहीं.....

by prem chand hembram
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अभी नहीं...गाँव के किनारे एक विशाल पीपल का वृक्ष था। उसकी फैली हुई शाखाएँ दूर-दूर तक शीतल छाया बिखेरती ...

এখন নয় ...…

by prem chand hembram
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এখন নয়...গ্রামের প্রান্তে এক বিশাল অশ্বত্থ গাছ দাঁড়িয়ে ছিল। তার বিস্তৃত শাখা-প্রশাখা দূরদূরান্ত পর্যন্ত শীতল ছায়া বিলিয়ে দিত। পাখিদের ...

মন্ত্র বীজ নাম ও মুক্তি

by prem chand hembram
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মন্ত্র, বীজনাম ও মুক্তি — ভারতীয় দর্শনের প্রকৃত দিশা ভারতীয় দর্শনে "মুক্তি" বা "মোক্ষ" মানবজীবনের সর্বোচ্চ লক্ষ্য বলে বিবেচিত ...

শ্রী শ্রী ঠাকুরের পঞ্চ নীতি

by prem chand hembram
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মুক্তির পঞ্চনীতি-পথ — শ্রীশ্রী ঠাকুর অনুকূলচন্দ্রের জীবনদর্শন ভারতীয় দর্শনে "মুক্তি" বা "মোক্ষ" মানবজীবনের সর্বোচ্চ লক্ষ্য হিসেবে বিবেচিত হয়েছে। সাধারণত ...