हरखू — जिंदगी और याददाश्त के बीचकई दिन बीत चुके थे।शहर के एक निजी अस्पताल में हरखू जिंदगी और ...
भाग : 09धर्म किसका है?सिनाराम मुर्मू कुछ क्षण तक बिल्कुल मौन खड़े रहे।बरामदे में बैठे लोगों की निगाहें अब ...
भाग : 08सुबह की किरणें धीरे-धीरे धरती पर अपना उजास बिखेर रही थीं। रात का घना अंधकार अब छँट ...
डॉक्टर रंगनाथन के नेतृत्व में हरखू के सिर का ऑपरेशन अंततः सफलतापूर्वक पूरा हुआ।ऑपरेशन थिएटर का दरवाजा बंद था ...
बांसुरी की धुन — भाग : ०७सत्संग अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँच चुका था।सभा में बैठे लोगों के चेहरों ...
रामचरण पूरे गाँव में अपनी ईमानदारी और साफगोई के लिए जाना जाता था। उसके बारे में किसी ने कभी ...
पूस की हाड़ कंपा देने वाली ठंड थी।हरखू का शरीर जंगली बेर की घनी झाड़ी में बुरी तरह फँसा ...
बांसुरी की धुनभाग : ०६रावण हेंब्रम ने धीरे-धीरे सभा की ओर देखा। उनके चेहरे पर संतोष की हल्की मुस्कान ...
उस समय की बात है, जब झारखंड बिहार से अलग नहीं हुआ था। गांवों में गरीबी और बेरोजगारी का ...
बांसुरी की धुनभाग : ०५प्रश्न जटिल था, लेकिन रावण हेंब्रम के चेहरे पर अब भी वही शांति थी।उन्होंने कुछ ...