आधा रास्ता लाज भरी खामोशी में तय हो चुका था। सन्नाटा इतना गहरा था कि हमारे पैरों की आहट ...
२सुबह की ताज़ा धूप सुकुमार कलियों के साथ खेल रही थी। हवा का प्रवाह धीमा था और उसमें फूलों ...
दो शब्द।बहुत सोचने के बाद भी मुझे कुछ नहीं सुझा इसलिए यह कविता लिख रहा हूँऔर फिर…. प्रेम परिणय ...
प्रेम के दो अध्याय अध्याय -1भाग- 2बाहर आकर मैं बागवानी में टहलने लगा। वहां की फिजा में महक थी, ...
प्रेम के दो अध्यायअध्याय- 1| भाग 1जब मैंने आँखें बंद की तब उस स्वर्णिम वेला का मनोरम दृश्य मेरे ...
मैंने घड़ी में समय देखा तो रात के 12 बज रहे थे, घर में सन्नाटा था। शायद सब लोग ...
भाग- १फाल्गुन की सुबह जब सूर्य निकलने वाला हो और उसकी तरुण रतनारी क्षितिज के वक्ष पर बिखरी-सी नज़र ...