गुरुकुल की ओर गमनसमय का चक्र बिना किसी अवरोध के निरंतर अपनी धुरी पर घूमता रहता है। उसे किसी ...
विष्णु भक्त प्रह्लाद का जन्मरानी कयाधू ने अब तक तीन पुत्रों को जन्म दिया था, जिनके नाम क्रमशः आह्लाद, ...
देवताओं के साथ युद्धअपने अंतःपुर दुर्ग और राज्य की विनाशलीला देखकर हिरण्यकशिपु क्रोध के मारे फुफकार उठा। रानी कयाधू ...
अजेय वरदान की प्राप्तिअसुर नगरी में जो भी घटित हुआ, उससे अनभिज्ञ असुरराज हिरण्यकशिपु अपनी तपस्या में लीन था। ...
प्रतिशोध की ज्वालाहिरण्याक्ष से राजपाट की बागडोर मिलने के पश्चात् हिरण्यकशिपु अत्यंत अहंकारी और अत्याचारी हो गया था। वह ...
हिरण्याक्ष का उत्थान एवं पतनजब से सृष्टि-चक्र आरंभ हुआ, तभी से पुण्य व पाप का इतिहास-चक्र भी अपने अंदर ...
श्रीहरि का नरसिंह अवतारपौराणिक कथाओं में विष्णुभक्त प्रह्लाद की कथा का अत्यंत महत्त्व है। यह कथा अन्याय, अत्याचार एवं ...