कमरे का दरवाज़ा आधा खुला था…अंदर…श्रेया बिस्तर के कोने में बैठी…घुटनों में चेहरा छिपाएबिलख-बिलख कर रो रही थी…उसकी सिसकियाँ…दिल ...
अंधकार लोक का विशाल द्वार अब रितांश के सामने था। उसकी लाल आँखें क्रोध की अग्नि में जल रही ...
विराट ने कांपते हुए हाथों से संयोगिता के पैर पकड़ लिए। उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे, जो ...
(सुबह का समय। खिड़की से हल्की धूप कमरे में फैल रही है। पर कमरे में शांति नहीं, एक बेचैनी ...
रात अब और भी गहरी हो चुकी थी। अंधेरा इतना सघन था कि मानो वह रितांश के चारों ओर ...
वो पल…चारों के लिए जैसे समय को रोक देने वाला था…शिवांश…करण से लिपटा हुआ था…और शिवांशी…कबीर की उंगली पकड़कर ...
(पुराना वीरान शहर, जहाँ कभी "अमृत प्रोजेक्ट" की लैब हुआ करती थी। धुंध फैली हुई है। हवा में राख ...
रात गहरा चुकी थी। पार्टी धीरे-धीरे खत्म होने वाली थी, लेकिन विराट का मन कहीं और था। वह एक ...
रात गहरी हो चुकी थी। अग्निहोत्री हाउस में शादी की सारी रस्में पूरी हो चुकी थीं। पूरा घर थकान ...
समय बीतता गया…लेकिन उस फैसले का असर हर दिन गहरा होता गया…शिवांशी अब 5 साल की हो चुकी थी…उसकी ...