रात के सन्नाटे में खिड़की के पास बैठा, मैं आसमान में टिमटिमाते तारों को देख रहा था। बाहर बारिश ...
मैं अधूरा जी रहा हूं…“तेरे बिना साँसें तो हैं, पर ज़िंदगी नहीं…”कमरे की खामोशी अब मेरी साथी बन चुकी ...
मैं उसकी यादों में खुश हूँरात के अंधेरे में अक्सर मैं खुद से बातें करता हूँ। खिड़की पर टिमटिमाती ...
अब अन्वी उसकी ज़िंदगी में नहीं है,मगर उसकी ज़िंदगी का हर हिस्सा अब भी अन्वी से जुड़ा है।उसने प्रेम ...