आदित्य की धड़कनें तेज़ थीं। ट्रेन से उतरने के बाद से ही उसके भीतर एक अजीब सी बेचैनी घर ...
आदित्य का दिल अब सिर्फ एक चीज़ चाहता था—संयोगिता। समय बीतता जा रहा था, पर उसकी तड़प, उसकी बेचैनी ...
मुंबई की रफ़्तार हर किसी को अपने साथ बहा ले जाती है—लोकल की गूंजती पटरियाँ, ऑफिस की दौड़, और ...
मुंबई—वो शहर जो किसी एक ज़िंदगी की रफ़्तार से नहीं चलता, बल्कि लाखों धड़कनों की ताल पर सांस लेता ...
रेलवे स्टेशन की भीड़ भले ही रोज़ की तरह थी—ट्रेनों की आवाज़ें, चायवालों की पुकार, भागते कदम, और अपने-अपने ...
जैसलमेर की हवाएं उस दिन कुछ ज़्यादा ही उदास थीं। जैसे रेत के कणों में भी एक दर्द समाया ...
कॉलेज का ऑडिटोरियम हल्की-सी चहलकदमी और हलके संगीत से गूंज रहा था। दीवारों पर चिपके पोस्टर और रंगीन लाइट्स ...
सूरज अपनी अंतिम किरणों को धरती पर बिखेरते हुए धीरे-धीरे क्षितिज की ओर ढल रहा था। जैसलमेर की सोनाली ...
कॉलेज में तीसरा दिन था।शिवम अब धीरे-धीरे इस नए माहौल से घुलमिल रहा था। हर सुबह वह सबसे पहले ...
सुबह की हल्की गुलाबी धूप खिड़की के शीशे से छनकर शिवम के कमरे में फैली हुई थी। दीवार पर ...