तेरा साथ है कितना प्यारा

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"ओ मेरी सोनपरी आज गुमसुम क्यों बैठी हो तुम भला , कहां गए तुम्हारे सारे खेल खिलौने , गुड्डे गुड़िया ?" वह चुप खड़ी , अपनी चीनी आंखों से तक देख ती रही मुझे । वह कहती ," मां कब दोगे वक्त मुझे "। मैं सब काम छोड़ एक तक देखती रही उससे । मैंने कहा "बेटा मैं तो बस तुम सब का जीवन सुखद बनाने के लिए काम करती हूं ।" मेरी नन्हीं परी ने मुझे कहा " मेरा तो सुख मां तुझसे ही है , तुम मेरे पास रहो वही मेरे लिए जीवन का सबसे बड़ा