शर्मिंदगी

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हमारा बाजीगरों का मोहल्ला था।बाजीगर मतलब नट!हालांकि हम लोग खुद को उनसे ऊंची जाति का समझते।नट दो बांसों के बीच तनी हुई रस्सी पर संतुलन बैठाकर चलने का खेल दिखाने वाले।रमल के पांसों से हाथ की सफाई का खेल करने वाले।भालू के गले में रस्सी बांधकर उसे गली गली घुमा नाचने को विवश करने का हुनर जानने वाले लोग।कहते हैं कि हमारे बुजुर्गों के दरवाजे पर शेर शेरनी यूं बंधे रहते थे जैसे आप लोगों के दरवाजे पर भैंस गाय बकरी!मैं सुनता तो कोरी गप्प लगती मुझे।हमारी बिरादरी के लोग पंजाब,हरियाणा और उत्तर प्रदेश न जाने कहां कहां फैले पड़े