पथरीले कंटीले रास्ते - 24

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  24   जेल के उस मुलाकात के कमरे में बग्गा सिंह अपने बेटे के साथ दुख सुख बाँट रहा था । बारह तेरह दिन बाद उसे बेटे से मिलने का अवसर मिला था और वह इस अवसर का पूरा पूरा लाभ उठाना चाहता था । इस बीच सिपाही दो बार आकर कमरे में झांक गये थे । बग्गा सिंह का मन अभी भरा नहीं था । उसे लग रहा था कि बेटे से आज पहली बार मुलाकात हो रही है । इससे पहले उसने इस बेटे को कभी देखा ही नहीं । कभी जाना ही नहीं । घर में