यशस्विनी - 32

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दुराचार कब तक?इस गंभीर चिंता से दुखी आचार्य सत्यव्रत ने कहा,"नारी किसी भी देश या काल की रही हो, वह सदा से पूजनीय है और उसे इस तरह विजय का प्रतीक या भोग्य, बंधक वस्तु की तरह सौदेबाजी में इस्तेमाल कभी नहीं होना चाहिए।"  विवेक के मन में एक और घटना की गूंज अभी तक थी।भारत में ही राखी के दिन एक क्षेत्र में राखी बांधकर रात्रि में अपने भावी पति के साथ घर लौट रही एक युवती और उसकी बहन के साथ सामूहिक अनाचार की खबर। इस घटना का संदर्भ देते हुए विवेक ने आचार्य से पूछा,"आखिर नारी कब