चेकपोस्ट:चाणक्य

अध्याय १: चाणक्य का 'दफ्तर' और रडार जैसे कान       मंगलाचरण: एक रहस्यमयी आकृतिगर्मी की दोपहर हो या सर्दियों की गुनगुनी धूप, मोहल्ले की उस २० फुट चौड़ी सड़क के बाएं कोने पर एक 'अजूबा' हमेशा मौजूद रहता है। दूर से देखने वाले राहगीर अक्सर धोखा खा जाते हैं। कोई उसे म्युनिसिपलिटी का छोड़ा हुआ पुराना काला बोरा समझकर बचकर निकल जाता है, तो कोई सोचता है कि शायद किसी ट्रक से डामर का कट्टा गिर गया है। लेकिन जैसे-जैसे आप करीब पहुँचते हैं, उस 'बोरे' में हल्की सी हलचल दिखाई देती है। वह आकृति थोड़ी सांस लेती है,