अंश, कार्तिक, आर्यन - 9

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कोई भी इंसान इतना बेख़ौफ़,कैसे हो सकता है  की खुद को कानून से ऊपर,समझे।एक इंसान इतना निर्दयी अकेले के दम पर नहीं बनता।जरूर इसके पीछे बहुत ही बड़ी तागत का हाथ होता है। ये सब बाते कार्तिक को रात भर सोने नहीं देती। कमरे की लाइट बंद थी,मोबाइल की स्क्रीन हल्की-सी चमक रही थी।कार्तिक चुपचाप..आर्यन की सोशल प्रोफ़ाइल देख रहा था —पुरानी तस्वीरें,इवेंट्स,शादियाँ,राजनीतिक चेहरों के साथ खिंचवाए गए फ़ोटो।और तभी उसे पहली बार एहसास हुआ—आर्यन की ताक़त उसके दोस्तों से नहीं आती।वह उसके परिवार से आती है।अगर उसे आर्यन को मिटाना है तो, पहले उसे उसके परिवार में घुसना होगा।अगले कुछ दिन कार्तिक