सुधा की तबीयत अब पहले से काफी बेहतर हो चुकी थी। माँ को स्वस्थ देखकर राजू के चेहरे पर भी खुशी लौट आई थी। लेकिन खुशियों के साथ एक नई परेशानी भी सामने आ खड़ी हुई थी। माँ के इलाज, दवाइयों और अच्छे खाने-पीने में उनके सारे पैसे खर्च हो चुके थे। अब घर में एक भी पैसा नहीं बचा था। पिछले तीन महीने कैसे गुजर गए, इसका पता ही नहीं चला। इन तीन महीनों में राजू न तो फेरी लगाने गया था और न ही उसने अपनी माँ को काम पर जाने दिया था। वह चाहता था कि माँ