अध्याय 15: मिलन का उत्सव और मर्यादाओं का संगमजैसे ही आचार्या वसुंधरा का संदेश पूरे विशाल गुरुकुल में फैला, वहाँ का अनुशासन भरा सन्नाटा एक अद्भुत उल्लास में बदल गया। वर्षों से लड़कों और लड़कियों के बीच जो एक अदृश्य और पत्थर जैसी दीवार खड़ी थी, आज वह भावनाओं के सैलाब में ढहने वाली थी। छात्रों के चेहरों पर जो कल तक प्रशिक्षण की थकान और आने वाले युद्ध का डर था, वह अब एक नई और कोमल चमक में बदल चुका था।तैयारियों का शोरमहागुरु ने इस उत्साह को भांप लिया था। उन्होंने ऊँचे चबूतरे से घोषणा की, "आज की