चार घंटे बाद का समय। छेदीपुरा गाँव से करीब तीन किलोमीटर दूर। सड़क किनारे घनी झाड़ियाँ। अनीश ने गाड़ी धीरे से कच्चे रास्ते पर उतारी और इंजन बंद कर दिया। रात गहरी थी। दूर कहीं कुत्ते भौंक रहे थे। जोगी ने पीछे का दरवाज़ा खोला। डिक्की से पहला ड्रोन निकाला। भारी मशीन। चार मोटे रोटर। काले मैट फिनिश वाला ढाँचा। उसने बाजू पर कंट्रोल स्ट्रैप बाँधा। टैबलेट ऑन किया। स्क्रीन पर सिस्टम बूट हुआ। SYSTEM READY जोगी ने ड्रोन ज़मीन पर रखा। “लॉन्च करूँ?” अनीश ने दूर अंधेरे में झाँका। “कर।” जोगी ने अंगूठे से कंट्रोल दबाया। ड्रोन के रोटर