बरगद की छाया

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बरगद की छायाहरखू जन्म से ऐसा न था।उसका दिमाग एकदम साफ और संतुलित था—मानो किसी कुशल कारीगर ने हर नट-बोल्ट कसकर लगाया हो।पर एक दिन दिहाड़ी मजदूरी करते समय मचान पर काम करते हुए अचानक ऊपर से पानी से भरी एक बाल्टी उसके सिर पर आ गिरी।गनीमत थी कि बाल्टी प्लास्टिक की थी।चोट गहरी तो नहीं लगी, पर सिर देर तक झनझनाता रहा।साथियों ने कहा—“डॉक्टर को दिखा लो हरखू।”हरखू हँसकर टाल गया—“डॉक्टर के पास गए तो दवा ही दवा लिख देगा… और मजदूरी भी चली जाएगी।”वह पास के गाँव के रहीम चाचा के पास गया।रहीम चाचा ने नाड़ी देखी,