1. पीढ़ियों का चक्रव्यूहये चक्रव्यूह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता है,जैसे-जैसे नई-नई प्रेमिकाएँ जन्म लेती हैं।ये सिलसिला जारी रहता है, और हर नई प्रेमिका,अनजाने में या जानबूझकर, उसी जाल में फँसती चली जाती है।जिसे उसने दूसरों के लिए बुना था।ये एक ऐसा दुष्चक्र है, जहाँ सम्मान पाने की चाह में,दूसरे का अपमान किया जाता है।और अंततः, वही अपमान अपने हिस्से आता है।क्या आपको लगता है कि इस चक्र को कभी तोड़ा जा सकता है?या यह समाज का एक अंतहीन हिस्सा है?और नई-नई प्रेमिकाएँ बनती हैं, नई पीढ़ी की,जो प्रेमिका नई बनी, जाल एक पत्नी के लिए।जब वो प्रेमिका से पत्नी बनती है,नई पीढ़ी