तीसरे पहर का सपना

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---तीसरे पहर का सपना प्रस्तावनातीसरा पहर — दिन का वह समय जब सूरज अपनी तपिश खोने लगता है, खेतों में काम करने वाले किसान घर लौटने की तैयारी करते हैं, और गाँव की गलियों में बच्चों की किलकारियाँ गूँजती हैं। यह पहर अक्सर थकान और विश्राम का होता है, लेकिन कभी-कभी यही समय जीवन की सबसे गहरी दस्तक बन जाता है।  ---पहला दृश्य: नीम की छायारामकिशन अपने आँगन में बैठा था। नीम की शाखों से छनकर आती धूप उसके चेहरे पर पड़ रही थी। उसकी आँखों में चिंता थी। बेटी सुहानी महीनों से शहर में पढ़ रही थी, पर कोई खबर नहीं।  गीता