अनकही - 5

  • 366
  • 120

मेहरीश ने चाबी को अपने बैग में रखा और पूरा दिन सोचती रही। हर बार जब वह कंप्यूटर स्क्रीन देखती, तो उसकी नज़र बैग पर चली जाती। वह चाबी सिर्फ धातु का टुकड़ा नहीं थी, वह एक चुनाव थी। एक दुनिया में कदम रखने का निमंत्रण जो उसकी अपनी दुनिया से कोसों दूर थी।शाम को घर लौटते हुए उसने रयान को मैसेज किया: "मुझे एक दिन और चाहिए।"रिप्लाई तुरंत आया: "टेक ऑल द टाइम यू नीड। आई विल वेट।"उस रात मेहरीश ने अपनी माँ की तस्वीर के सामने बैठकर बात की, जैसे वह हमेशा करती थी जब उसे कोई बड़ा