भाग 7: परीक्षा एक, भय का सामनापूर्णिमा की रात के बाद का पहला दिन चंद्रनगर में एक अजीब सी शांति लेकर आया था। वर्मा हवेली अब खाली नहीं लग रही थी, तीन आत्माएँ और एक रहस्यमय बंधन उसे जीवित कर रहे थे।आर्यन हवेली के बरामदे में बैठा अपनी कलाई के निशान को देख रहा था। मृया का हाथ अब और स्पष्ट था, जैसे कोई जीवित चीज़ उसकी त्वचा के नीचे धड़क रही हो। विजय की वापसी ने सब कुछ बदल दिया था, अब यह दो नहीं, तीन आत्माओं की कहानी थी।"तुम सोच रहे हो कि यह सब क्यों?" मृया की