भाग 8: परीक्षा दो, विश्वासघात की छायादूसरे दिन की सुबह चंद्रनगर में एक अजीब सी उम्मीद लेकर आई। हवेली के बरामदे में आर्यन, मृया और विजय नाश्ता कर रहे थे, हालाँकि विजय और मृया को खाने की ज़रूरत नहीं थी, पर आर्यन की संगति में उन्हें एक सामान्य जीवन का एहसास हो रहा था।"कल की परीक्षा," मृया ने कहा, अपनी चाय के कप को घुमाते हुए। "विश्वासघात। इसका क्या मतलब हो सकता है?"विजय ने गहरी साँस ली। "शायद वे हमें एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करेंगे। हमें चुनाव करने को कहेंगे।""पर हम चुनाव नहीं करेंगे," आर्यन ने दृढ़ता से कहा। "हम एक