__समर्पित पुरुष___एक पुरुष के लिए बेहद कठिन है प्रेम कर पाना और उससे भी कठिन शायद उस प्रेम में समर्पित हो जाना..।इसमें गलती उनकी भी नहीं, यह तो हमारे समाज में उत्पन्न कुविचारों के कारण है।गलती हमारे परिवेश ,हमारे लालन-पालन, भरण-पोषण के तौर तरीकों में है।एक बच्चा जो अपने घर परिवार और समाज में देखता है वही सीखता है।उस बच्चे ने अपने पिता की कठोरता,बिना गलती मां और अन्य घर की स्त्रियों पर चिल्लाना, खुद की गलती को न मानना,किसी भी फैसले में स्त्रियों के हस्तक्षेप को वर्जित रखना।अपनी बात रख रही स्त्रियों व बच्चों को "मुंह लग रही है,जुबान