एक छोटी सी भूल

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एक छोटी सी भूल“आप पुरानी सोच के हैं…”अपनी ही बेटी के मुँह से निकले ये शब्द,शहर के प्रतिष्ठित वकील रामगोपाल वर्मा के हृदय को चीर गए।उन्होंने जीवन में अनेक कठिनाइयाँ देखी थीं,परंतु कभी हार नहीं मानी थी।अपनी मेहनत और ईमानदारी के बल पर उन्होंने समाज में एक सम्मानजनक स्थान बनाया था।उनकी एक ही संतान थी—श्रृष्टि।रामगोपाल उसे पुत्र से कम नहीं समझते थे।उनकी सारी आशाएँ, सारे सपने उसी पर टिकी थीं।वे अक्सर स्नेह से कहा करते—“मेरी बेटी ही मेरा गर्व है… वही मेरे जीवन की सबसे बड़ी आशा बनेगी।”श्रृष्टि को शहर के एक प्रतिष्ठित अंग्रेज़ी माध्यम विद्यालय में पढ़ाया गया।अच्छी