मंजिले - भाग 47

  • 729
  • 252

-------------------------- कब्ज (2) ----------------"ये भोजन ले जाओ सलमा " खसम ने सिर पकड़े कहा। "पाकिस्तान का वजीर मर जाये " सलमा ने कहा... " "कयो बेगम ---उसने कया कर दिया!” सलमा बोली " एक ढंग का हॉस्पिटल नहीं है, दवाई नहीं है, लोग करोने से मरे, हम कब्ज से मर रहे है। " खूब हसा, हसने वाली बात थी। " कयो हसे " सलमा ने कहा। ये भी पाबंदी है। " फिर वो लटके से मुँह से चले गयी। रात के दस वजे होंगे। बिजली घुल हो चुकी थी। " कया करता अब्दुल दुखी पिता... हुक्म चद के रूम मे