सच्चे प्रेम को कैसे परखे?

  • 564
  • 183

सच्चे प्रेम को कैसे परखे?कबीर साहेब ने कहा है कि, “पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोय, ढाई अक्षर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।”यह पुस्तक पढ़-पढ़कर तो पूरा जगत् मर गया, लेकिन पंडित कोई बना नहीं। शास्त्र के शास्त्र पढ़ डाले पर ढाई अक्षर प्राप्त नहीं हुए और भटक कर मर गए। लेकिन जिसे प्रेम के सिर्फ़ ढाई अक्षर समझ में आ गए वह पंडित हो गया। अगर खुद प्रेमस्वरूप हो जाए तो वहाँ पूरा शास्त्र पूर्ण हो जाता है।प्रेम की व्याख्यापरम पूज्य दादा भगवान को भी बचपन से मन में यह प्रश्न था कि प्रेम की व्याख्या क्या होगी?