कैद बा-मशक्कतकमल चोपड़ाप्रहार से बचने के लिए पीछे हटी थी, मुक्का उसे न लगकर दीवार में जा लगा था। दर्द से बिलबिलाता और गुस्से में फनफनाता हुआ पति लगभग पागल-सा हो आया था। पत्नी का अपना बचाव करना भी गुनाह हो गया था।अच्छी-भली जुबान थी उसके पास पर वह बोल नहीं सकती थी। सही सलामत हाथ-पाँव थे उसके पास पर वह चला नहीं सकती थी। आँखें थीं उसके पास पर वह सपने नहीं देख सकती थी। उसके पास भी एक दिल था पर वह कुछ चाह नहीं सकती थी। उसकी भी कुछ इच्छाएं थीं पर उन्हें उसे मारना होता क्योंकि