पापा का पुराना फोन

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रवि शहर में बड़ी कंपनी में नौकरी करता था।अच्छी तनख्वाह, बड़ा ऑफिस, नए दोस्त — सब कुछ था उसके पास।लेकिन इन सबके बीच वह धीरे-धीरे अपने गाँव और अपने पिता से दूर होता जा रहा था।उसके पिता गाँव में छोटी-सी किराने की दुकान चलाते थे।हर रात ठीक 9 बजे रवि के फोन का इंतज़ार करते।लेकिन रवि हमेशा व्यस्त रहता।कभी मीटिंग…कभी दोस्तों की पार्टी…कभी थकान…और फिर वह सोचता,“कल बात कर लूँगा।”एक दिन पिता ने खुद फोन किया।पुराने फोन की टूटी आवाज़ में बोले,“बेटा, खाना खा लिया?”रवि लैपटॉप पर काम कर रहा था। झुंझलाकर बोला,“पापा, मैं अभी बहुत बिज़ी हूँ… बाद में