चलो दूर कहीं..! - 19

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चलो दूर कहीं.. 19सुमी की चुप्पी प्रतीक्षा को खाए जा रहा था, प्रतीक्षा  की सिसकियां रात के उस निरव वातावरण में प्रतिध्वनित होकर ऐसे गूंज रही थी मानो पुरी कायनात सिसक रही हो..। प्रतीक्षा रवि का एक झलक पाने के लिए व्याकुल थी..वह लगातार रोते हुए सुमी से रवि के बारे में पूछ रही थी, लेकिन सुमी की चेतना जैसे निष्ठुर हो गई थी , उसके बातों का उसपर कोई असर नहीं हो रहा था। वह दीवार पर टेक लगाए पथराई आंखों से फूस के छप्पर में बने सुराख को घूर रही थी..जैसे उसकी सारी आशाएं, उमंगें और खुशियां इस