SYMMETRY

प्रातः 6:00 बजेआर्या की आँख खुली।एकदम ठीक छह बजे।वह कुछ सेकंड तक छत को देखती रही।फिर अचानक उठ बैठी।अलार्म नहीं बजा था।उसने मोबाइल उठाया।6:00 AM.एक सेकंड भी ऊपर-नीचे नहीं।उसकी भौंहें सिकुड़ गईं। मुंबई में वह कभी समय पर नहीं उठती थी।कभी पाँच घंटे सोती, कभी बारह।कभी पूरी रात जागती रहती।पर यहाँ…उसका शरीर किसी अदृश्य घड़ी की तरह व्यवहार कर रहा था।वह बाथरूम में गई।जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला, lights अपने आप जल उठीं।सफेद रोशनी।बहुत साफ़।बहुत स्थिर।उसने शीशे में खुद को देखा—और कुछ क्षण रुक गई।उसकी आँखों के नीचे के dark circles हल्के हो गए थे।सिर्फ एक रात में।“Impossible…”उसने चेहरा छुआ।त्वचा असामान्य