”रात के करीब ढाई बजे।पुराने मिल एरिया की टूटी सड़कों पर पुलिस की गाड़ियों की लाल-नीली लाइट्स चमक रही थीं।बारिश अभी-अभी रुकी थी और सड़क पर जमा पानी में उन लाइट्स की परछाइयाँ अजीब डर पैदा कर रही थीं।चारों तरफ पुलिस वाले दौड़ रहे थे।“ऊपर कोई गया क्या?”“नहीं सर!”“पीछे वाला रास्ता चेक करो!”ACP कबीर राठौड़ अपनी जीप के पास खड़ा बिल्डिंग को देख रहा था।तीन मंज़िला पुरानी इमारत।टूटी खिड़कियाँ।जंग लगे लोहे के दरवाजे।लेकिन कबीर की नजर सिर्फ ऊपर तीसरी मंजिल पर थी।जहाँ कुछ मिनट पहले गोलियों की आवाजें गूँजी थीं।उसने धीरे से सिगरेट निकाली।आग लगाई।एक लंबा कश लिया।फिर बिना कुछ