साढ़े तीन बीघा

मैंने पहली बार रामकिशन यादव का नाम सिरसी थाने की केस डायरी में देखा था। FIR नंबर 347/2024, धारा 302, 120B, 201। कागज पर स्याही थोड़ी फैली हुई थी, जैसे लिखने वाले सिपाही के हाथ कांप रहे हों। तारीख थी 13 दिसंबर 2024, सुबह 6:42। शिकायतकर्ता था रामकिशन का बड़ा बेटा अजय। उसने लिखा था, पापा रात से घर नहीं लौटे, उनका फोन बंद है, और खेत की मेड़ पर खून के धब्बे हैं।उस दिन के बाद अगले तीन महीने तक मैं इसी केस के पीछे रहा, क्योंकि उत्तर प्रदेश के संभल जिले के इस छोटे से कस्बे सिरसी में