खण्डार जैसी जगह थी वो , किसी टूट चुके महल के अवशेष जैसे , कई बड़े छोटे पत्थर यहां वहां बिखरे हुए थे , ऊंची नीची जमीन उसमे भी बारिश जैसा का मौसम था… हाँ, वही बारिश जो उसे बिल्कुल पसंद नहीं थी।वो लड़का उसी बारिश से बचकर भाग रहा था… मानो भीग गया तो देह जल जाएगी। तभी कुछ हमउम्र लड़कों ने उसका रास्ता घेर लिया।“बहुत अच्छाई करने का शौक है न तुझे… अब कैसे बचेगा?” एक लड़के ने तंज कसा।उसने हल्की सी नजर उठाई, सबकी आँखों में देखा और शांत लेकिन सख्त आवाज़ में बोला, “हाश… हमें ये