खोटा सिक्का

खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो अग्नि की लालिमा से रंग उठा था। बेला की सुगंध हवा में घुलकर वातावरण को मधुर बना रही थी। खेतों में सरसों की अंतिम पीली छटा झिलमिला रही थी और कोयल की पहली कूक वसंत के आगमन की घोषणा कर रही थी।उसी गाँव में पंडित रामशंकर झा का बड़ा नाम था।संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान, महाविद्यालय के प्राध्यापक, सौ एकड़ उपजाऊ भूमि के स्वामी और समाज के सम्मानित व्यक्ति। विशाल हवेली, आम और लीची के बाग, नौकर-चाकर, धन-दौलत—किसी वस्तु की कमी नहीं