चलो दूर कहीं..! - 22

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चलो दूर कहीं.. 22अनाह के माथे की लाइट जबतक जलती रही रोहन बुत बना खड़ा रहा.. और जैसे ही लाइट बुझी वैसे ही अनाह ने कहा, " क्या हुआ मि. रोहन आप तो मुझे ऐसे घूर रहे हैं जैसे मैं कोई भूत हूं..?" "अरे .. नहीं.. नहीं... ऐसी कोई बात नहीं है। दरअसल मुझे ऐसा लगा जैसे मैं यहां हूं ही नहीं..! और तुम पर कैसा शक तुम हमारी प्रतीक्षा के फ्रेंड हो तो मेरे भी फ्रेंड हुए.. अच्छा छोड़ो इन बातों को चलो पहले कुछ खा लेते हैं.. जोरों की भूख लगी है। " कहकर वह अनाह को देखा तो